जोधपुर के राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) के 12वें संस्करण के दूसरे दिन मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में 19 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।इन फिल्मों को देखने के लिए बड़ी संख्या में जोधपुरवासी पहुंचे, जहां शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और म्यूजिक वीडियो को लेकर दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिला, वही OTT प्लेटफॉर्म पर आधारित टॉक शो में जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म, सिनेमा के बदलते स्वरूप और नए कलाकारों के अवसरों पर चर्चा की गई। टॉक शो में स्टेज OTT के CCO व को-फाउंडर प्रवीण सिंघल, फिल्म व टीवी अभिनेत्री सुज़ैन बर्नेट, व अभिनेता संगीतकार रतुल शंकर और भारतीय निर्देशक व निर्माता सतराजित सेन ने अपने अनुभव साझा किए कार्यक्रम का संचालन RIFF के फेस्टिवल डायरेक्टर अंशु हर्ष ने किया।
स्टेज ओटीटी के सीसीओ और सह-संस्थापक प्रवीण सिंघल ने बताया कि ओटीटी आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि लोकल कहानियों को ग्लोबल मंच देने का मजबूत जरिया बन चुका है। उन्होंने कहा कि गांवों और छोटे शहरों में थिएटर की कमी रही है, लेकिन इंटरनेट और मोबाइल ने यह बाधा खत्म कर दी है। ओटीटी के जरिए देश-विदेश में रह रहे लोग अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़ी कहानियों से दोबारा जुड़ पा रहे हैं। स्टेज ने हरियाणवी, राजस्थानी, भोजपुरी और गुजराती कंटेंट पर फोकस कर यह साबित किया कि सच्ची और जमीन से जुड़ी कहानियों को न बड़े सितारों की जरूरत होती है और न भारी बजट की। आज स्टेज ओटीटी पर करीब 60 लाख पेड सब्सक्राइबर हैं, जो रीजनल सिनेमा के लिए भुगतान कर कंटेंट देख रहे हैं, जो इस सोच की सबसे बड़ी सफलता है।
फिल्म और टीवी एक्टर सुज़ैन बर्नर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर कहा कि वेब सीरीज़ की कहानियाँ फिल्म और टीवी दोनों से अलग होती हैं। वेब सीरीज़ ऐसे विषयों पर बनती हैं जिन्हें न तो दो घंटे की फिल्म में समेटा जा सकता है और न ही रोज़ाना आने वाले टीवी शो में दिखाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टीवी में काम की रफ्तार बहुत तेज़ होती है, जहाँ रोज़ लंबे घंटे शूटिंग करनी पड़ती है, जबकि फिल्मों में प्रक्रिया काफी धीमी होती है। वेब सीरीज़ इन दोनों के बीच का माध्यम है, जहाँ बेहतर कहानी और अभिनय का मौका मिलता है। सुज़ैन ने कहा कि ओटीटी ने नए और गंभीर विषयों के लिए रास्ते खोले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवाद या भाषा तभी सही लगती है जब वह कहानी की ज़रूरत हो, जबरदस्ती कुछ डालना उन्हें ठीक नहीं लगता।
रतुल शंकर ने कहा कि उनका मुख्य दृष्टिकोण संगीत से जुड़ा हुआ है, क्योंकि वे पेशे से एक म्यूज़िशियन हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म करीब 25 साल पहले की थी, जब वे स्कूल से निकलकर कॉलेज में आए ही थे। इतने वर्षों बाद निर्देशक शतरजीत ने उन्हें अपनी फिल्म में अभिनय का मौका दिया। रतुल शंकर ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को कलाकारों के लिए एक बड़ा अवसर बताया। उनका कहना है कि ओटीटी ने कई बेहतरीन कलाकारों, संगीतकारों और निर्देशकों को सामने आने का मौका दिया है, जिन्हें पहले बड़े बैनर या फिल्मों में अवसर नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि ओटीटी के आने से स्टारडम की जगह टैलेंट को अहमियत मिली है और भारत जैसे देश में छुपी प्रतिभाओं के लिए नए रास्ते खुले हैं।
बंगाली फिल्म निर्देशक सत्राजित सेन ने कहा कि सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स समाज को गहराई से प्रभावित करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब सलमान खान किसी फिल्म में नया हेयरस्टाइल अपनाते हैं, तो पूरा देश उसे फॉलो करने लगता है। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। भले ही ओटीटी पर सेंसरशिप अभी पूरी तरह लागू न हो, लेकिन आत्म-नियमन बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई निजी संस्थाएं सेल्फ-रेग्युलेटरी बॉडी बनाकर कंटेंट की समीक्षा कर रही हैं। सत्राजित सेन का मानना है कि कहानी कहने पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, लेकिन उसे कहने का नजरिया सकारात्मक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार होना चाहिए, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर दर्शकों को प्रभावित करता है।
ओटीटी और स्वतंत्र सिनेमा ने कंटेंट की दुनिया में बड़ा बदलाव किया है। आज दर्शक केवल बड़े सितारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मजबूत कहानी, सच्चे किरदार और नए प्रयोगों को भी खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं। RIFF जैसे फिल्म फेस्टिवल नए फिल्मकारों, संगीतकारों और कलाकारों को एक ऐसा मंच देते हैं, जहाँ उनकी प्रतिभा को पहचान मिलती है। मंच से कहा गया कि भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, ज़रूरत सिर्फ सही प्लेटफॉर्म की है। ओटीटी और फिल्म फेस्टिवल्स ने मिलकर नए रचनाकारों के लिए अवसरों के दरवाज़े खोले हैं और यही सिनेमा का भविष्य है।
इन फिल्मों का हुआ प्रदर्शन
राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 12वें संस्करण के दूसरे दिन मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में 19 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। उक्यांग नागवा मेघालय शॉर्ट एनिमेशन फिल्म लोककथाओं और पारंपरिक वीरता पर आधारित रही, जिसने कम समय में गहरी छाप छोड़ी।वेरे ओरु केस मलयालम फीचर फिल्म एक रहस्यमयी केस पर केंद्रित रही, जिसमें सस्पेंस और दमदार अभिनय देखने को मिला।फौजी शॉर्ट एनिमेशन फिल्म ने साहस, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम का संदेश देकर युवाओं को प्रेरित किया। खीर शॉर्ट फिल्म ने ग्रामीण परिवेश में मानवीय रिश्तों और भावनाओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया।
आज 10 से अधिक फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन
राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन सोमवार को 10 से अधिक फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन किया जाएगा। इन सभी फिल्मों को जोधपुर के मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में निशुल्क रूप में दिखाया जाएगा। मेरा स्कूल,खाटो मीठो, बींदणी नंबर 1, बैसा रा नैन, मोरचंग, ओमलो, रूबरू, चक्का जाम,अली अली, बैरन, अनप्लग्ड, महारो श्याम ये सभी, फिल्म स्क्रीनिंग के साथ राजस्थानी भाषा की दिशा और दशा पर बातचीत की जाएगी और सीमा कपूर की बायोग्राफी यूं गुजरी है अब तलक पर उनके साथ चर्चा की जाएगी ।
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