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जयपुर। प्रदेश मे स्कूलों के हालात सुधारने की मुहिम मे भामाशाहों का योगदान साल-दर -साल महत्वपूर्ण होता जा रहा है। अपने अनमोल सहयोग और मदद की चाहत ने भामाशाहों का योगदान प्रदेश के तरक्की और शिक्षण व्यस्वस्था मे बड़े सुधार की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष शिक्षा भूषण सम्मान के लिए सीएसआर, व्यक्तिगत भामाशाह अवं गैर-सरकारी संस्थाओ को भामाशाह सम्मान के लिए  जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। शुक्रवार 28 जून को सूबे के मुख्यामंत्री अशोक गेहलोत शिक्षा भामाशाह को जयपुर मे सम्मानित करने जा रहे है। 
राउंड टेबल इंडिया के राजस्थान चैप्टर को इस बार फिर से भामाशाह सम्मान से नवाजा जायेगा। इस अवसर पर सभी 13 चैप्टर्स को उनके सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा। इस वर्ष दिए जाने वाले शिक्षा भूषण सम्मान के लिए कुल 13 भामाशाह शामिल है। इन भामाशाहो द्वारा 2.69 करोड़ का दान शिक्षा के लिए दिया गया। शिक्षा भूषण सम्मान मे सरकारी प्रोजेक्ट पर 15 लाख या इससे ज्यादा दान देकर सहायता करने वाले भामाशाहों को शामिल किया गया है। शिक्षा भूषण सम्मान समारोह बित्ते तीन सालो से आयोजित किया जा रहा है। पहले वर्ष 2 और दूसरे वर्ष 10 भामाशाहो को सम्मानित किया गया था। राउंड टेबल इंडिया  की और से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पियूष डागा और राजस्थान चैप्टर के चेयरमैन विनम्र जालान सहित राउंड टेबल के 13 प्रतिनिधि इस अवसर पर सम्मान ग्रहण करेंगे।
राउंड टेबल इंडिया के राजस्थान अध्यक्ष विनम्र जालान के मुताबिक,राउंड टेबल राजस्थान मे मुख्याधारा और शिक्षा को लेकर पिछड़ रहे बच्चो के लिए सहभागी है,इसका गर्व हमारी पूरी टीम को है। राउंड टेबल इंडिया भविष्य मे भी शिक्षण क्षेत्र मे सुधार के करने  लिए निरंतर अपनी भूमिका समाज के लिए सुनिश्चित करता रहेगा।

*राउंड टेबल इंडिया का अहम योगदान*
राउंड टेबल इंडिया की स्थापना 1962 मे की गई थी। इसके संस्थापकों मे  18 -40 वर्ष के ऐसे यंग अचीवर्स शामिल थे,जिन्होंने अंतराष्ट्रीय संबंधो को कायम करते हुए सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दी। विश्व के कई देशो के साथ भारत मे भी राउंड टेबल के अंतर्गत संगठन बेहद सफल रहा। 
भारत मे राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत बिते 20 सालों मे 2588 स्कूलों और 6189 कक्षाओं का निर्माण करवाया गया। करीब 220 करोड़ रुपये की लागत की इन् परियोजनाओ से देश के शिक्षा जगत मे आधार स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे सीधे तौर पर 60 लाख सुविधाओं से वंचित छात्र -छात्राओं को लाभ मिला। वर्ष 1998 मे राउंड टेबल इंडिया ने राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर फ्रीडम थ्रू एजुकेशन का बीड़ा उठाया और समाज पर गहरा असर छोड़ा। स्कूल ,टॉयलेट बनवाने,पेयजल सुविधाएं विकसित करने,पुस्तकालय,विज्ञान प्रयोगशालाएं इत्यादि स्थापित करने के अलावा राउंड टेबल मुख्यधारा से पिछड़े लोगो के लिए प्रयासरत है। फिलहाल देश मे अपने 280 चैप्टर के करीब 4500 सदस्यों के लिए राउंड टेबल 111 शहरों और कस्बों मे  सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सामाजिक रूप से पिछड़ो के लिए जीवनदायिनी संस्था बनकर उभर रही है।

राउंड टेबल इंडिया को मुख्यमंत्री करेंगे सम्मानित



जयपुर। प्रदेश मे स्कूलों के हालात सुधारने की मुहिम मे भामाशाहों का योगदान साल-दर -साल महत्वपूर्ण होता जा रहा है। अपने अनमोल सहयोग और मदद की चाहत ने भामाशाहों का योगदान प्रदेश के तरक्की और शिक्षण व्यस्वस्था मे बड़े सुधार की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष शिक्षा भूषण सम्मान के लिए सीएसआर, व्यक्तिगत भामाशाह अवं गैर-सरकारी संस्थाओ को भामाशाह सम्मान के लिए  जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। शुक्रवार 28 जून को सूबे के मुख्यामंत्री अशोक गेहलोत शिक्षा भामाशाह को जयपुर मे सम्मानित करने जा रहे है। 
राउंड टेबल इंडिया के राजस्थान चैप्टर को इस बार फिर से भामाशाह सम्मान से नवाजा जायेगा। इस अवसर पर सभी 13 चैप्टर्स को उनके सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा। इस वर्ष दिए जाने वाले शिक्षा भूषण सम्मान के लिए कुल 13 भामाशाह शामिल है। इन भामाशाहो द्वारा 2.69 करोड़ का दान शिक्षा के लिए दिया गया। शिक्षा भूषण सम्मान मे सरकारी प्रोजेक्ट पर 15 लाख या इससे ज्यादा दान देकर सहायता करने वाले भामाशाहों को शामिल किया गया है। शिक्षा भूषण सम्मान समारोह बित्ते तीन सालो से आयोजित किया जा रहा है। पहले वर्ष 2 और दूसरे वर्ष 10 भामाशाहो को सम्मानित किया गया था। राउंड टेबल इंडिया  की और से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पियूष डागा और राजस्थान चैप्टर के चेयरमैन विनम्र जालान सहित राउंड टेबल के 13 प्रतिनिधि इस अवसर पर सम्मान ग्रहण करेंगे।
राउंड टेबल इंडिया के राजस्थान अध्यक्ष विनम्र जालान के मुताबिक,राउंड टेबल राजस्थान मे मुख्याधारा और शिक्षा को लेकर पिछड़ रहे बच्चो के लिए सहभागी है,इसका गर्व हमारी पूरी टीम को है। राउंड टेबल इंडिया भविष्य मे भी शिक्षण क्षेत्र मे सुधार के करने  लिए निरंतर अपनी भूमिका समाज के लिए सुनिश्चित करता रहेगा।

*राउंड टेबल इंडिया का अहम योगदान*
राउंड टेबल इंडिया की स्थापना 1962 मे की गई थी। इसके संस्थापकों मे  18 -40 वर्ष के ऐसे यंग अचीवर्स शामिल थे,जिन्होंने अंतराष्ट्रीय संबंधो को कायम करते हुए सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दी। विश्व के कई देशो के साथ भारत मे भी राउंड टेबल के अंतर्गत संगठन बेहद सफल रहा। 
भारत मे राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत बिते 20 सालों मे 2588 स्कूलों और 6189 कक्षाओं का निर्माण करवाया गया। करीब 220 करोड़ रुपये की लागत की इन् परियोजनाओ से देश के शिक्षा जगत मे आधार स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे सीधे तौर पर 60 लाख सुविधाओं से वंचित छात्र -छात्राओं को लाभ मिला। वर्ष 1998 मे राउंड टेबल इंडिया ने राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर फ्रीडम थ्रू एजुकेशन का बीड़ा उठाया और समाज पर गहरा असर छोड़ा। स्कूल ,टॉयलेट बनवाने,पेयजल सुविधाएं विकसित करने,पुस्तकालय,विज्ञान प्रयोगशालाएं इत्यादि स्थापित करने के अलावा राउंड टेबल मुख्यधारा से पिछड़े लोगो के लिए प्रयासरत है। फिलहाल देश मे अपने 280 चैप्टर के करीब 4500 सदस्यों के लिए राउंड टेबल 111 शहरों और कस्बों मे  सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सामाजिक रूप से पिछड़ो के लिए जीवनदायिनी संस्था बनकर उभर रही है।

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