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जयपुर। देश में करीब 2 करोड़ से अधिक लोग अपनी डिसेबिलिटी की वजह से ऐतिहासिक मॉन्यूमेंट्स पर नहीं जा पाते हैं। शहर की हेरिटेज को देखने दुनिया के लोग यहां आते हैं, पर  ऐसी जगहों पर डिसेबिलिटी लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं होने से उनके चेहरे पर मायूसी उभर आती है। यातायात के साधन ही नहीं, रैम्प आदि की भी सुविधा नहीं होने पर ऐसे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि दुनिया के जर्मनी और यूएसए समेत अनेक देशों में डिसेबल्ड लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे वॉशरुम समेत उनके चढऩे-उतरने के लिए रैम्प आदि की माकूल व्यवस्था है। यह कहना है मिस इंडिया व्हीलचेयर रनरअप-2017 अंकिता शर्मा का। 
वे बुधवार को एमआई रोड होटल लेजर इन ग्रैंड चाणक्य में गोल्डन लीफ फाउंडेशन (जीएलएफ)और जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल(जिफ) के बियॉन्ड होराजइन टॉक सीरीज में अपनी सक्सेज जर्नी शेयर कर रही थीं। कार्यक्रम को मॉडरेट अमृता मौर्य ने किया। अंकिता की जज्बे, जज्बात और जुनून से लबरेज जर्नी रोमांचक
और दिलचस्प रही। इस मौके पर होटल के फूड एंड बेवरजे मैनेजर शान सिद्दीकी, मिसेज इंटरनेशनल एशिया-2018 डॉ.अनुपमा सोनी समेत शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

समाज का माइंड सैट होना जरूरी
टेडेक्स स्पीकर अंकिता ने कहा कि डिसेबल्ड लोगों के लिए हमारे देश में फिलहाल सरकार और सोसायटी का माइंड सैट नहीं बना है, ताकि ऐसे लोगों को समाज का अहम हिस्सा समझ सकें और उनके साथ  सिम्पैथी नहीं सेंसिटिव बिहेवियर कर सकें।  माइंड सैट होगा तो ही समाज में बदलाव होगा। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अब दिली-ख्वाहिश है कि मिस वल्र्ड कॉन्टेस्ट का हिस्सा बनूं और अपने देश को दुनिया के बड़े मंच पर रिप्रेजेंट करूं, लेकिन प्रॉपर जानकारी  नहीं होने से यह कॉन्टेस्ट एक ड्रीम बना हुआ है। मिस फैमिना में तो सरकार का भी सहयोग होता है। पोस्ट ग्रेजुएट के बाद मैंने एमएनसी में जॉब भी किया। मैं अपने सभी जरूरी काम अच्छे से पूरा करती हूं पर, प्राइवेट जॉब में डिसेबल्ड लोगों को नौकरी नहीं मिलती है। फिलहाल सरकारी नौकरी भी कई नियम-कानून के बीच झूल रही है। ऐसे लोगों के लिए नौकरी एक दिवास्वप्न बना है।

नहीं भुला पाई हादसे को...
अपनी मर्मस्पर्शी जर्नी में अंकिता ने बताया कि वे 2009 के हादसे को अभी तक नहीं भुला पाई है। कजिन भाई का वेडिंग रिसेप्शन था, अचानक पेड़ की टहनी उव पर गिरी। रीढ़ की हड्डी में अधिक चोट लगने से दोनों पैरों न काम करना बंद कर दिया। देश-दुनिया के काफी डॉक्टर्स को दिखाया, इलाज कराया पर फायदा नहीं मिला। डॉक्टर्स कहते हैं कि शायद 4-5 साल में पैरों में हलचल हो सकती है।

विभिन्न क्षेत्रों की सम्मानित हुई हस्तियां 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीसीसी उपाध्यक्ष व जेसीएफ के चेयरमैन राजीव अरोड़ा व विशिष्ट अतिथि रघुसिन्हा माला सिन्हा ट्रस्ट के डायरेक्टर सुधीर माथुर ने विभिन्न क्षेत्रों की शहर की  पांच हस्तियां का सम्मान किया। सम्मानित  होने वालों में मशहूर साहित्यकार मृदुला बिहारी, सिल्वरीन की ब्यूटी एक्सपर्ट पूर्णिमा गोयल, दर्शक संस्था की फाउंडर (संगीत) प्रोमिला राजीव भट्ट, गोलछा ज्वैल्स के ओनर विजय गोलछा, आर्च  कॉलेज ऑफ डिजाइन की डायरेक्टर अर्चना सुराणा शामिल रहीं। जीएलएफ की डायरेक्टर दीप्ति गैरोला व जिफ के फाउंडर-डायरेक्टर हनुरोज ने बताया कि कार्यक्रम का मकसद ऐसी हस्तियों के विचारों को लोगों तक पहुंचाना है, जिन्होंने अपने जज्बे और जुनून से समाज को रचनात्मक दिशा दी है। संचालन लीजा चन्देल ने किया। 

बियॉन्ड होराइजन टॉक सीरीज में मिस इंडिया व्हीलचेयर रनरअप अंकिता शर्मा ने की अपनी जर्नी शेयर


जयपुर। देश में करीब 2 करोड़ से अधिक लोग अपनी डिसेबिलिटी की वजह से ऐतिहासिक मॉन्यूमेंट्स पर नहीं जा पाते हैं। शहर की हेरिटेज को देखने दुनिया के लोग यहां आते हैं, पर  ऐसी जगहों पर डिसेबिलिटी लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं होने से उनके चेहरे पर मायूसी उभर आती है। यातायात के साधन ही नहीं, रैम्प आदि की भी सुविधा नहीं होने पर ऐसे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि दुनिया के जर्मनी और यूएसए समेत अनेक देशों में डिसेबल्ड लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे वॉशरुम समेत उनके चढऩे-उतरने के लिए रैम्प आदि की माकूल व्यवस्था है। यह कहना है मिस इंडिया व्हीलचेयर रनरअप-2017 अंकिता शर्मा का। 
वे बुधवार को एमआई रोड होटल लेजर इन ग्रैंड चाणक्य में गोल्डन लीफ फाउंडेशन (जीएलएफ)और जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल(जिफ) के बियॉन्ड होराजइन टॉक सीरीज में अपनी सक्सेज जर्नी शेयर कर रही थीं। कार्यक्रम को मॉडरेट अमृता मौर्य ने किया। अंकिता की जज्बे, जज्बात और जुनून से लबरेज जर्नी रोमांचक
और दिलचस्प रही। इस मौके पर होटल के फूड एंड बेवरजे मैनेजर शान सिद्दीकी, मिसेज इंटरनेशनल एशिया-2018 डॉ.अनुपमा सोनी समेत शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

समाज का माइंड सैट होना जरूरी
टेडेक्स स्पीकर अंकिता ने कहा कि डिसेबल्ड लोगों के लिए हमारे देश में फिलहाल सरकार और सोसायटी का माइंड सैट नहीं बना है, ताकि ऐसे लोगों को समाज का अहम हिस्सा समझ सकें और उनके साथ  सिम्पैथी नहीं सेंसिटिव बिहेवियर कर सकें।  माइंड सैट होगा तो ही समाज में बदलाव होगा। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अब दिली-ख्वाहिश है कि मिस वल्र्ड कॉन्टेस्ट का हिस्सा बनूं और अपने देश को दुनिया के बड़े मंच पर रिप्रेजेंट करूं, लेकिन प्रॉपर जानकारी  नहीं होने से यह कॉन्टेस्ट एक ड्रीम बना हुआ है। मिस फैमिना में तो सरकार का भी सहयोग होता है। पोस्ट ग्रेजुएट के बाद मैंने एमएनसी में जॉब भी किया। मैं अपने सभी जरूरी काम अच्छे से पूरा करती हूं पर, प्राइवेट जॉब में डिसेबल्ड लोगों को नौकरी नहीं मिलती है। फिलहाल सरकारी नौकरी भी कई नियम-कानून के बीच झूल रही है। ऐसे लोगों के लिए नौकरी एक दिवास्वप्न बना है।

नहीं भुला पाई हादसे को...
अपनी मर्मस्पर्शी जर्नी में अंकिता ने बताया कि वे 2009 के हादसे को अभी तक नहीं भुला पाई है। कजिन भाई का वेडिंग रिसेप्शन था, अचानक पेड़ की टहनी उव पर गिरी। रीढ़ की हड्डी में अधिक चोट लगने से दोनों पैरों न काम करना बंद कर दिया। देश-दुनिया के काफी डॉक्टर्स को दिखाया, इलाज कराया पर फायदा नहीं मिला। डॉक्टर्स कहते हैं कि शायद 4-5 साल में पैरों में हलचल हो सकती है।

विभिन्न क्षेत्रों की सम्मानित हुई हस्तियां 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीसीसी उपाध्यक्ष व जेसीएफ के चेयरमैन राजीव अरोड़ा व विशिष्ट अतिथि रघुसिन्हा माला सिन्हा ट्रस्ट के डायरेक्टर सुधीर माथुर ने विभिन्न क्षेत्रों की शहर की  पांच हस्तियां का सम्मान किया। सम्मानित  होने वालों में मशहूर साहित्यकार मृदुला बिहारी, सिल्वरीन की ब्यूटी एक्सपर्ट पूर्णिमा गोयल, दर्शक संस्था की फाउंडर (संगीत) प्रोमिला राजीव भट्ट, गोलछा ज्वैल्स के ओनर विजय गोलछा, आर्च  कॉलेज ऑफ डिजाइन की डायरेक्टर अर्चना सुराणा शामिल रहीं। जीएलएफ की डायरेक्टर दीप्ति गैरोला व जिफ के फाउंडर-डायरेक्टर हनुरोज ने बताया कि कार्यक्रम का मकसद ऐसी हस्तियों के विचारों को लोगों तक पहुंचाना है, जिन्होंने अपने जज्बे और जुनून से समाज को रचनात्मक दिशा दी है। संचालन लीजा चन्देल ने किया। 

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