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जयपुर | फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की 2 दिन तक चली बैठक के बाद जल्द ही राज्य में बिल्डिंगों में फायर, लाइफ सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर कई अहम बदलाव किए जाएंगे


अब आने वाले समय में आपको होटल या शॉपिंग मॉल में जाने से पहले सेफ्टी और सिक्योरिटी के पैरामीटर्स पूर्व में ही पता चल जाएंगे और इससे यह पता रहेगा की बिल्डिंग आपके वहां जाने लायक है या नहीं ?

फायर सिक्योरिटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की दो दिवसीय जयपुर की बैठक में यह अहम फैसले लिए गए
 फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से इंटरनेशनल प्रेसिडेंट पंकज धारकर ने बताया कि नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के सिक्योरिटी पैरामीटर्स की सख्ती से पालना किया जाना बेहद जरूरी है 

उन्होंने कहा कि हमारे देश में 170000 लोगों की दुर्घटना में अकाल मौत हो जाती है जो कि काफी गंभीर विषय है


इंटरनेशनल प्रेसिडेंट पंकज धाकरकर ने बताया कि दुबई में 26 सितंबर से 29 सितंबर तक इंटरनेशनल बैठक में अग्नि और अग्नि से जनित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे देश भर के विषय विशेषज्ञ मंथन करेंगे

उन्होंने कहा कि देश में सभी शहरों के हालात खराब है सूरज जैसे कांड कहीं भी हो सकते हैं और जयपुर शहर की भी स्थिति अच्छी नहीं है उन्होंने कहा कि जयपुर में फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से समय-समय पर अवेयरनेस कैंप लगाए गए हैं और पूरे देश भर में साल भर तक चलेंगे उनका मानना है कि फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की पहल पर ही बिल्डिंग में मानक तय किए जा रहे हैं जिससे बिजली उपकरणों की तरह यह पता चल सकेगा कि बिल्डिंग फायर सिस्टम को लेकर स्मार्ट है या नहीं ?

उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनाई जाए और उन्होंने कहा कि देश में फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 23 चैप्टर मिलकर अब तक 480000 लोगों को फायर सिक्योरिटी सिस्टम्स के बारे में अलर्ट कर चुके हैं 

उन्होंने मुंबई का हवाला देते हुए कहा कि फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अवेयरनेस प्रोग्राम के कारण वहां पर एक छोटी बच्ची ने कई लोगों की जान बचाई थी उन्होंने कहा कि आग को रोकने के लिए देश में बड़ी संख्या में अवेयरनेस किया जाना जरूरी है उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि देश में फायर ऑफिसर की बेहद कमी है साथ ही देश में फायर जैसे बड़े विषय को लेकर फायर मिनिस्टर तक नहीं होते हैं उन्होंने पश्चिम बंगाल की तारीफ करते हुए कहा कि केवल पश्चिम बंगाल में फायर मिनिस्टर होते हैं साथ ही उन्होंने कहा कि सूरत की घटना के बाद सरकार ने दिखाने के लिए बिल्डिंग की चेकिंग तो शुरू किया लेकिन आग लगने के बाद घटनाक्रम को रोकने के लिए देश में फायर एक्सपर्ट्स की बेहद कमी है साथ ही साथ उन्होंने सीबीएसई और कॉलेज स्तर पर फायर को सिलेबस में जोड़ने की भी वकालत की


बिल्डिंग खुद बताएगी मैं सेफ हूं या नहीं ?

आने वाले समय में जयपुर ही नहीं बिल्कुल राजस्थान के व्यवसायिक और घरेलू इलाकों में आप जिस बिल्डिंग में घुस रहे हैं उससे पहले आपको पता चल जाएगा की बिल्डिंग कितनी सुरक्षित  है वह फायरप्रूफ है या नहीं 

इसी को लेकर राजस्थान में एक बड़ी कवायद चल रही है फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 12 - 13 जुलाई को जयपुर में जुटें

12 - 13 जुलाई को जयपुर में जुटकर सभी ने इस मुद्दे पर चर्चा की और जल्द ही इसका एक ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेजेंगे की जितनी भी बिल्डिंग है उनकी नए सिरे से रेटिंग की जाए और जैसे एसी फ्रिज टीवी कूलर को रेटिंग मिलती है जिससे उनकी गुणवत्ता का आकलन होता है उसी तरह से आने वाले समय में जयपुर की बिल्डिंग का रेटिंग और रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा और उससे यह पता चल जाएगा कि बिल्डिंग फायरप्रूफ है या नहीं ?

 फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एफ एस ए आई) द्वारा फायर सेफ्टी बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम पर विशेषज्ञों द्वारा मंथन - 

जयपुर फायर सेक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिनांक 12 - 130जुलाई को  होटल हिल्टन में इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स, बिल्डर्स, जयपुर नगर निगम के अधिकारी एवं कंसल्टेंट्स द्वारा फायर की घटनाओ को देखते हुए बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम पर मंथन किया तथा 13 जुलाई को देश के कोने कोने से विशेषज्ञ एकत्रित हुए ताकि देश में भवनों का निर्माण इस प्रकार किया जाए की अधिक से अधिक फायर प्रूफ वन से एवं जन हानि से बचा जा सके। एफ एस ए आई जयपुरअध्यक्ष श्री आर एस सक्सेना एवं सचिव श्री अंकित माहेष्वरी ने बताया कि इस परिचर्चा में 100 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया

रिसर्च का काम जोरों पर 

फायर सिक्याेरिटी एक्सपर्ट का मानना है कि घराें, माॅल्स और प्राइवेट बिल्डिंग्स में आग जनित हादसाें काे राेकने के लिए देशभर में एक रेटिंग सिस्टम लागू के साथ इंटरनेशनल स्टेंडर्ड तय हाेने चाहिए। फायर सिक्याेरिटी एसाेसिएशन इस तरह के रेटिंग सिस्टम पर बारीकी से रिसर्च रह रही है ताकि ऐसे हादसाें काे राेका जा सके। फायर सिक्याेरिटी एसाेसिएशन के इंटरनेशनल पंकज धारकर ने बताया कि सच्चाई यह है कि देश में फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट फुटबाॅल बना हुआ  है, किसी भी राज्य में इस पर काेई तय मानक नहीं बने हुए जबकि दूसरे विकसित देशाें में यदि किसी के घर में ऐसे हादसे हाेते भी है ताे आटोमेटिक सूचना फायर सेफ्टी टीम तक
पहुंचती है और  गलती पर जुर्माना भी लगता है। ऐसे नियम यहां भी हाेना जरूरी है। काॅन्फ्रेंस में एमईपी कंसल्टेंट संदीप गाेयल ने बताया कि फायर सेफ्टी के लिए जरूरी है कि जिस तरह से हमें ट्रेफिक रूल्स सिखाए जाते है
उसी तरह हर सिटीजन काे बेसिक एलीमेंट्री नाॅलेज मिलनी चाहिए। देश में सभी बड़ी समस्या अवेयरनेस काे लेकर है। सिक्याेरिटी एक्सपर्ट गुरूपवन सिंह गैरी ने बताया कि आज यदि यंगस्टर्स से पूछले पर पर्यावरण प्रदुषण सबसे बड़ी समस्या बताते है, जबकि आज जाे सबसे बड़ी प्राॅब्लम है वाे है फायर सेफ्टी की। हम साेल्जर एंड सेफ्टी बनाना चाहते है जाे खुद की सेफ्टी के साथ दूसराें काे भी आग जनित हादसाें से बचने के लिए अवयेर कर सकें।

बिल्डिंग खुद बताएगी मैं सेफ हूं या नहीं ?


जयपुर | फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की 2 दिन तक चली बैठक के बाद जल्द ही राज्य में बिल्डिंगों में फायर, लाइफ सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर कई अहम बदलाव किए जाएंगे


अब आने वाले समय में आपको होटल या शॉपिंग मॉल में जाने से पहले सेफ्टी और सिक्योरिटी के पैरामीटर्स पूर्व में ही पता चल जाएंगे और इससे यह पता रहेगा की बिल्डिंग आपके वहां जाने लायक है या नहीं ?

फायर सिक्योरिटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की दो दिवसीय जयपुर की बैठक में यह अहम फैसले लिए गए
 फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से इंटरनेशनल प्रेसिडेंट पंकज धारकर ने बताया कि नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के सिक्योरिटी पैरामीटर्स की सख्ती से पालना किया जाना बेहद जरूरी है 

उन्होंने कहा कि हमारे देश में 170000 लोगों की दुर्घटना में अकाल मौत हो जाती है जो कि काफी गंभीर विषय है


इंटरनेशनल प्रेसिडेंट पंकज धाकरकर ने बताया कि दुबई में 26 सितंबर से 29 सितंबर तक इंटरनेशनल बैठक में अग्नि और अग्नि से जनित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे देश भर के विषय विशेषज्ञ मंथन करेंगे

उन्होंने कहा कि देश में सभी शहरों के हालात खराब है सूरज जैसे कांड कहीं भी हो सकते हैं और जयपुर शहर की भी स्थिति अच्छी नहीं है उन्होंने कहा कि जयपुर में फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से समय-समय पर अवेयरनेस कैंप लगाए गए हैं और पूरे देश भर में साल भर तक चलेंगे उनका मानना है कि फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की पहल पर ही बिल्डिंग में मानक तय किए जा रहे हैं जिससे बिजली उपकरणों की तरह यह पता चल सकेगा कि बिल्डिंग फायर सिस्टम को लेकर स्मार्ट है या नहीं ?

उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनाई जाए और उन्होंने कहा कि देश में फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 23 चैप्टर मिलकर अब तक 480000 लोगों को फायर सिक्योरिटी सिस्टम्स के बारे में अलर्ट कर चुके हैं 

उन्होंने मुंबई का हवाला देते हुए कहा कि फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अवेयरनेस प्रोग्राम के कारण वहां पर एक छोटी बच्ची ने कई लोगों की जान बचाई थी उन्होंने कहा कि आग को रोकने के लिए देश में बड़ी संख्या में अवेयरनेस किया जाना जरूरी है उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि देश में फायर ऑफिसर की बेहद कमी है साथ ही देश में फायर जैसे बड़े विषय को लेकर फायर मिनिस्टर तक नहीं होते हैं उन्होंने पश्चिम बंगाल की तारीफ करते हुए कहा कि केवल पश्चिम बंगाल में फायर मिनिस्टर होते हैं साथ ही उन्होंने कहा कि सूरत की घटना के बाद सरकार ने दिखाने के लिए बिल्डिंग की चेकिंग तो शुरू किया लेकिन आग लगने के बाद घटनाक्रम को रोकने के लिए देश में फायर एक्सपर्ट्स की बेहद कमी है साथ ही साथ उन्होंने सीबीएसई और कॉलेज स्तर पर फायर को सिलेबस में जोड़ने की भी वकालत की


बिल्डिंग खुद बताएगी मैं सेफ हूं या नहीं ?

आने वाले समय में जयपुर ही नहीं बिल्कुल राजस्थान के व्यवसायिक और घरेलू इलाकों में आप जिस बिल्डिंग में घुस रहे हैं उससे पहले आपको पता चल जाएगा की बिल्डिंग कितनी सुरक्षित  है वह फायरप्रूफ है या नहीं 

इसी को लेकर राजस्थान में एक बड़ी कवायद चल रही है फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 12 - 13 जुलाई को जयपुर में जुटें

12 - 13 जुलाई को जयपुर में जुटकर सभी ने इस मुद्दे पर चर्चा की और जल्द ही इसका एक ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेजेंगे की जितनी भी बिल्डिंग है उनकी नए सिरे से रेटिंग की जाए और जैसे एसी फ्रिज टीवी कूलर को रेटिंग मिलती है जिससे उनकी गुणवत्ता का आकलन होता है उसी तरह से आने वाले समय में जयपुर की बिल्डिंग का रेटिंग और रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा और उससे यह पता चल जाएगा कि बिल्डिंग फायरप्रूफ है या नहीं ?

 फायर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एफ एस ए आई) द्वारा फायर सेफ्टी बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम पर विशेषज्ञों द्वारा मंथन - 

जयपुर फायर सेक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिनांक 12 - 130जुलाई को  होटल हिल्टन में इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स, बिल्डर्स, जयपुर नगर निगम के अधिकारी एवं कंसल्टेंट्स द्वारा फायर की घटनाओ को देखते हुए बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम पर मंथन किया तथा 13 जुलाई को देश के कोने कोने से विशेषज्ञ एकत्रित हुए ताकि देश में भवनों का निर्माण इस प्रकार किया जाए की अधिक से अधिक फायर प्रूफ वन से एवं जन हानि से बचा जा सके। एफ एस ए आई जयपुरअध्यक्ष श्री आर एस सक्सेना एवं सचिव श्री अंकित माहेष्वरी ने बताया कि इस परिचर्चा में 100 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया

रिसर्च का काम जोरों पर 

फायर सिक्याेरिटी एक्सपर्ट का मानना है कि घराें, माॅल्स और प्राइवेट बिल्डिंग्स में आग जनित हादसाें काे राेकने के लिए देशभर में एक रेटिंग सिस्टम लागू के साथ इंटरनेशनल स्टेंडर्ड तय हाेने चाहिए। फायर सिक्याेरिटी एसाेसिएशन इस तरह के रेटिंग सिस्टम पर बारीकी से रिसर्च रह रही है ताकि ऐसे हादसाें काे राेका जा सके। फायर सिक्याेरिटी एसाेसिएशन के इंटरनेशनल पंकज धारकर ने बताया कि सच्चाई यह है कि देश में फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट फुटबाॅल बना हुआ  है, किसी भी राज्य में इस पर काेई तय मानक नहीं बने हुए जबकि दूसरे विकसित देशाें में यदि किसी के घर में ऐसे हादसे हाेते भी है ताे आटोमेटिक सूचना फायर सेफ्टी टीम तक
पहुंचती है और  गलती पर जुर्माना भी लगता है। ऐसे नियम यहां भी हाेना जरूरी है। काॅन्फ्रेंस में एमईपी कंसल्टेंट संदीप गाेयल ने बताया कि फायर सेफ्टी के लिए जरूरी है कि जिस तरह से हमें ट्रेफिक रूल्स सिखाए जाते है
उसी तरह हर सिटीजन काे बेसिक एलीमेंट्री नाॅलेज मिलनी चाहिए। देश में सभी बड़ी समस्या अवेयरनेस काे लेकर है। सिक्याेरिटी एक्सपर्ट गुरूपवन सिंह गैरी ने बताया कि आज यदि यंगस्टर्स से पूछले पर पर्यावरण प्रदुषण सबसे बड़ी समस्या बताते है, जबकि आज जाे सबसे बड़ी प्राॅब्लम है वाे है फायर सेफ्टी की। हम साेल्जर एंड सेफ्टी बनाना चाहते है जाे खुद की सेफ्टी के साथ दूसराें काे भी आग जनित हादसाें से बचने के लिए अवयेर कर सकें।

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